कोरोना से ठीक हो चुके 50 फीसदी मरीजों में एंटीबॉडी गायब,

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लखनऊ: कोरोना को मात देने वाले 50 प्रतिशत विजेताओं में एंटीबॉडी नहीं मिल रही है। ठीक होने के 14 दिन बाद प्लाज्मा दान करने पहुंचे लोगों की एंटीबॉडी नहीं मिल रही है। बड़े पैमाने पर कोरोना विजेताओं में एंटीबॉडी न मिलने से डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है।

कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। केजीएमयू कोरोना विजेताओं को प्लाज्मा दान करने लिए जागरुक कर रहा है। ताकि कोरोना के गंभीर मरीजों की समय पर प्लाज्मा थेरेपी की जा सके। अब तक 175 कोरोना विजेता प्लाज्मा दान कर चुके हैं। 150 को प्लाज्मा थेरेपी की जा चुकी है।

ठीक होने के 14 दिन बाद कर सकते हैं प्लाज्मा दान
प्लाज्मा दान करने से पहले एंटीबॉडी की जांच की जाती है। केजीएमयू के ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चन्द्रा के मुताबिक कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आने के 14 दिन बाद व्यक्ति प्लाज्मा दान कर सकता है। सामान्यता तीन माह वायरस की एंटीबॉडी शरीर में रहती है। इसकी पहचान के लिए खून से एंटीबॉडी जांच की जाती है।

1000 की हुई जांच
प्लाज्मा दान से पहले करीब 1000 कोरोना विजेताओं की अब तक जांच की गई है। इसमें 50 प्रतिशत में एंटीबॉडी नहीं मिली। सीएम हेल्प लाइन सेवा में करीब 650 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसमें 92 कर्मचारी पॉजिटिव आए थे। पहली बार में 47 कोरोना विजेताओं की जांच की गई। 18 में एंटीबॉडी मिली। दूसरी बार में 22 की जांच हुई। जिसमें 11 कर्मचारी में एंटीबॉडी मिली। केजीएमयू के रेजिडेंट डॉक्टरों में भी एंटीबॉडी गैरमौजूद थी।

डॉ. संदीप तिवारी ने किया प्लाज्मा दान
केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी ने प्लाज्मा दान किया। डॉ. संदीप व उनके परिवार के सदस्य कोरोना की चपेट में आ गए थे। ठीक होने के बाद डॉ. संदीप तिवारी ने प्लाज्मा दान किया। डॉ. संदीप ने बताया कि कोरोना के गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए वह हर वक्त तैयार हैं।

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