अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 15 लाख करोड़ के पैकेज की जरूरत

0
157
Economy

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था को पुनर्जिवित करने के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने 15 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की मांग की है। सीआईआई ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर लॉकडाउन की बड़ी मार पड़ी है। ऐसे में पहले का जो अनुमान 4.5 लाख करोड़ रुपये का था, अब उससे कहीं अधिक है। सीआईआई ने केंद्र सरकार को 15 लाख करोड़ रुपये के तत्काल प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करने की सिफारिश की है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 7.5 प्रतिशत के बराबर है। भारतीय उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने कहा कि जब तक लॉकडाउन का तीसरा चरण समाप्त नहीं होता तब तक अर्थव्यवस्था लगभग दो महीने का उत्पादन खो देगी।

किसने कितना मांगा राहत पैकेज

बता दें भारत में 25 मार्च से चल रहा लॉकडाउन 17 मई को समाप्त होने वाला है। इससे अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतर गई है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अन्य उद्योग संघों ने भी एक बड़े प्रोत्साहन पैकेज की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने 10 लाख करोड़ के पैकेज के लिए कहा है, जबकि पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने 16 लाख करोड़ रुपये की मांग की है। इससे पहले पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने गरीबों के लिए 65000 करोड़ के राहत पैकेज की मांग की थी।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने प्रोत्साहन पैकेज की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ” नीति आयोग ने 10 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज का प्रस्ताव किया है और हमने 14 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का सुझाव दिया है।” हालांकि उद्योग निकायों ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत सरकार की प्रारंभिक प्रतिक्रिया का समर्थन किया है।

1.7 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दे चुकी है सरकार

सरकार ने 26 मार्च को पीएमजीकेवाई के तहत 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.8 फीसदी है। कल्याणकारी पैकेज का उद्देश्य गरीबों को तीन महीने का राशन और रसोई गैस उपलब्ध कराकर, महिलाओं, बुजुर्गों और विकलांगों को मुफ्त और सीधे नकद हस्तांतरण के लिए तत्काल राहत प्रदान करना था।

सीआईआई के सुझाव

CII ने कहा कि गरीब और उद्योग दोनों को सरकार की ओर से तत्काल प्रोत्साहन की आवश्यकता है, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए। CII ने लोगों को सैलरी देने और नौकरी के नुकसान को रोकने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये तत्काल सहायता की मांग की। करीब 6 करोड़ MSMEs के लिए CII ने एक क्रेडिट सुरक्षा योजना का सुझाव दिया, जहां 60-70% ऋण की गारंटी सरकार द्वारा दी जानी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here