आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति, अगस्त तक ढेर किए गए 139 आतंकी

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नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद आज पहली बार जम्मू कश्मीर में आतंकियों की मौत से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया है कि इस साल के पहले आठ महीनों में जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा 139 आतंकवादियों को ढेर किया गया है।

आतंकियों की इस संख्या में नियंत्रण रेखा के साथ-साथ झड़पों में मारे गए आतंकवादियों के साथ-साथ राज्य के भीतरी इलाकों में सेना के साथ विभिन्न एनकाउंटर में ढेर किए गए आतंकवादी शामिल हैं।यह आंकड़े इस साल 1 जनवरी से 29 अगस्त तक कश्मीर में सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन में ढेर आतंकियों की संख्या को लेकर जारी किए गए हैं। हालांकि इन आतंकी ऑपरेशंस के दौरान सेना के विभिन्न रैंकों से जुड़े 26 जवानों की शहादत देनी पड़ी।

सेना का बयान
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अगस्त के महीने में सेना द्वारा पांच आतंकवादियों को ढेर किया गया हैै, जबकि इस दौरान एक आतंकी को पकड़ा भी गया था। मई के महीने में सेना ने 27 आतंकवादियों को मार गिराया था जो कि 2019 में किसी भी महीने में मारे गए आतंकियों की संख्या में सबसे ज्यादा है। जम्मू-कश्मीर में इस महीने में सबसे ज्यादा आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस दौरान 22 घटनाएं सामने आईं। जम्मू-कश्मीर में जनवरी से अगस्त तक कुल 87 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गई है।

पाकिस्तानी बैट ऑपरेशन को किया नाकाम
जुलाई के अंतिम सप्ताह में पाकिस्तान के बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) ऑपरेशन की कोशिश को भी भारतीय सेना ने नाकाम किया था। इस दौरान चार से अधिक पाकिस्तान बैट कमांडो को सेना के जवानों द्वारा गोलियों से भून दिया गया था, जब वो नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे।

सेना के अधिकारी ने कहा, ‘इस साल पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम उल्लंघन की संख्या से यह स्पष्ट है। पाकिस्तान ने इस साल भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए अपना रास्ता अख्तियार कर लिया है। पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ की कोशिशों पर नए सिरे से प्रयास किए गए हैं, खासतौर पर आर्टिकल 370 को खत्म करने के बाद।

लगातार सीजफायर उल्लंघन कर रहा पाक
जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान बौखलाहट में है। पांच अगस्त 2019 के बाद नियंत्रण रेखा के साथ 222 संघर्ष विराम उल्लंघन दर्ज किए गए हैं। संसद ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को पढ़कर जम्मू-कश्मीर को विशेष श्रेणी का दर्जा वापस ले लिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया।

इस कैलेंडर वर्ष में जुलाई के महीने में पाकिस्तान की ओर से सबसे अधिक संघर्ष विराम उल्लंघन (296) दर्ज किए गए हैं। यह वही महीना थआ जिस दौरान संयोग से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वाशिंगटन डीसी में मुलाकात की थी। इस वर्ष के पहले आठ महीनों में पाकिस्तान द्वारा 1889 बार संघर्ष विराम उल्लंघन किया जा चुका है जबकि 2018 में पूरे साल में एलओसी पर पाकिस्तान की ओर से 1629 युद्धविराम उल्लंघन हुए थे।

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