गौतम गंभीर ने नए बीसीसीआई प्रेसीडेंट को लेकर दिया बढ़ा बयान

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नई दिल्ली: पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने कहा कि अगर सौरव गांगुली को बीसीसीआई प्रमुख के रूप में केवल 10 महीने का समय मिलता है तो यह उनके जैसे टैलेंट की बर्बादी होगा। गंभीर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उन्हें 10 महीने से ज्यादा का वक्त मिलेगा। सौरव गांगुली को बधाई देने वालों में गौतम गंभीर का नाम भी जुड़ गया है। गांगुली 23 अक्टूबर को बीसीसीआई अध्यक्ष का पद संभालेंगे। ऐसे में गंभीर ने कहा, ”मैं नहीं जानता कि यह कैसे होगा, न ही मैं यह जानना चाहता हूं। मैं खुश हूं कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड की जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति को दी गई है, जिसे क्रिकेट के वातावरण की अच्छी समझ है। इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि उनका कार्यकाल 10 महीने से ज्यादा का हो।”

गौतम गंभीर ने यह भी कहा कि दादा का क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में पांच साल काम करना उनकी मदद करेगा। बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन में उन्होंने जो बदलाव किए वह बताते हैं कि दादा सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं है बल्कि अच्छे प्रशासक भी हैं। उन्होंने कहा, ”क्रिकेटर के रूप में गांगुली ने परिणाम दिए हैं। क्योंकि उन्हें ड्रेसिंग रूम से सपोर्ट मिलती रही। हालांकि, स्वर्गीय जगमोहन डालमिया के सपोर्ट के बिना दादा के लिए यह चुनौतीपूर्ण होता।”

गंभीर ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में अपने कॉलम में लिखा है, “भारतीय क्रिकेट ने बोर्ड में जीत हासिल कर ली है। शुरुआत के लिए भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को बीसीसीआई का अगला अध्यक्ष बनाया गया है जो भारतीय क्रिकेट द्वारा उठाया गया बड़ा कदम है। आमतौर पर बीसीसीआई का कामकाज प्रतिगामी और अस्पष्ट होता है, लेकिन पूर्व क्रिकेटर को बोर्ड में शामिल करना शानदार कदम है।”

कई पूर्व खिलाड़ियों ने गांगुली को बधाई दी है वहीं गंभीर चाहते हैं कि बधाई देने वाले पूर्व खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट को ऊंचाईयों तक पहुंचाने में गांगुली की मदद करें। गंभीर ने लिखा, “मुझे उम्मीद है कि दादा को उन पूर्व खिलाड़ियों से समर्थन मिले, जिन्होंने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। एक क्रिकेटर के तौर पर वह सफल इसलिए रह सके क्योंकि उन्हें ड्रैसिंग रूम से साथ मिल रहा था और साथ ही बीसीसीआई बोर्ड रूम से।”

उन्होंने लिखा, “दादा के लिए चीजें जगमोहन डालमिया के समर्थन के बिना चुनौतीपूर्ण रहतीं। उस दौरान गांगुली और कोच जॉन राइट ने सहवाग, नेहरा, युवराज, हरभजन और जहीर जैसे खिलाड़ियों को निखारा। दादा साथ ही भाग्यशाली थे कि उन्हें द्रविड़, कुंबले, तेंदुलकर, लक्ष्मण का साथ मिला। उन्हें इसी तरह का समर्थन बीसीसीआई के बड़े लोगों से चाहिए होगा जिनको पता है कि चुनौतियां कहां हैं।”

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